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सूर्यवंशी #परमार #राजपूतों #की #वंशावली

#सूर्यवंशी #परमार #राजपूतों #की #वंशावली 🔵🔵🔵🔵🔵🔵🔵🔵 #सतयुग सूर्यवंश वंशावली 1.आदित्य नारायण 2.ब्रह्मा 3 मरीचि (पत्नि सुमति) 4 कश्यप ( पत्नि अदिति (दक्षपुत्री)) 🔵🔵🔵🔵सूर्य🔵🔵🔵🔵 5 विवस्वान सूर्य 6 मनु (वैवस्वत+पत्नि संक्षा, अयोध्या बसाई)  (मनु के पुत्र-ऐक्ष्वाकु, नाभाग, धृष्ट, प्रासु, शर्याति, नरिष्यन, नागाभोदिष, करुष, प्रसघ्र- पुत्री ईला) 7 ऐक्ष्वाकु (ऐक्ष्वाकु वंश कहलाया)  (ऐक्ष्वाकु के पुत्र-विकुक्षी, निमि, दंड, नाभागारिष्ट, कुरुष, कुबद्ध)(ईनके 100 पुत्र थे, 50 उत्तरपंथ के राजवंश के स्थापक बने, 50 दक्षिणपंथ के राजवंश के स्थापक बने) 8 विकुक्षी (शशाद) 9 पुरंजय (कुकुत्स्थ)(देवासुर संग्राम मे देवता की मदद की) 10 अनेना (वेन) 🔵🔵🔵🔵 *पृथु* 🔵🔵🔵🔵 11 पृथु 12 विश्वरंधि (विश्वराश्व) 13 चंद्र (आर्द्र) 14 युवनाश्व  15 श्रावस्त (श्रावस्ति नगरी बसाई) 16 बृहद्श्व (लंबा आयुष्य भोग, वानप्रस्थ लिया) 17 कुवल्याश्व (धंधुमार)  (धंधुमार के पुत्र- द्रढाश्व, चंद्रश्व, कायलाश्व, भद्राश्व) 18 द्रढाश्व 19 हर्यश्व 20 निकुम्भ 21 ब्रहणाश्व (अमिताश्व=संहताश्व) ब्रहणाश्व के पुत्र-...

कैसे ज्ञात करें कि अपने वंश के कुलदेवता अथवा कुलदेवी कौन हैं

कैसे ज्ञात करें कि अपने वंश के कुलदेवता अथवा कुलदेवी कौन हैं आज के समय में प्राय: देख जा रहा है कि लोगों को अपने कुलदेवता व कुलदेवी कौन हैं यह ज्ञात ही नहीं है। वर्षों से कुलदेवता व कुलदेवी को पूजा नहीं मिल रही है। घर-परिवार का सुरक्षात्मक आवरण समाप्त हो जाने से अनेकानेक समस्याएं अनायास घेर रही हैं, नकारात्मक ऊर्जाओं की आवाजाही बिना रोक-टोक हो रही है, वर्षों से स्थान परिवर्तन के कारण पता ही नहीं है कि हमारे कुलदेवता व कुल देवी कौन है कैसे उनकी पूजा होती है कब उनकी पूजा होती है आदि।  यह ज्ञात करने के लिए एक प्रभावी प्रयोग है जिससे यह जाना जा सकता है कि  आपके कुलदेवता कौन है यह एक साधारण किन्तु प्रभावी प्रयोग है जिससे आप अपने कुलदेवता अथवा देवी को जान सकते हैं।  प्रयोग को मंगलवार से शुरू करें और ११ मंगलवार तक करते रहें।  मंगलवार को सुबह स्नान आदि से स्वच्छ पवित्र हो अपने देवी देवता की पूजा करें। फिर एक साबुत सुपारी लेकर उसे अपना कुलदेवता व कुलदेवी मानकर स्नान आदि करवाकर, उस पर मौली लपेटकर किसी पात्र में स्थापित करें।  इसके बाद आप अपनी भाषा में उनसे अनुरोध करें कि ...

राजपूत, शराब और मांसाहार

*राजपूत, शराब और मांसाहार*... """""""""""""""""""""""""""""""""" राजपूतों ने जब से मांसाहार और शराब को अपनाया तभी से मुगल से पराजित होना शुरू हुआ… राजपूतों का सिर धड से अलग होने के बाद कुल देवी युद्ध लडा करती थी… “एक षड्यंत्र और माँस और शराब की घातकता….” हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है......... ये सिर्फ़ एक मुग़लों का षड्यंत्र था हिंदुओं को कमजोर करने का ! जानिये एक सच्ची ऐतिहासिक घटना… “एक षड्यंत्र और शराब की घातकता….” कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ?? जानिये और फिर सुधार कीजिये !!              मुगल का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे ।             उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की “है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?”               सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक...

लक्ष्मणगढ़ सीकर के शेखावत राजपूतो का इतिहास

●लक्ष्मणगढ़ सीकर के शेखावत राजपूतो का इतिहास● ●आमेर का इतिहास● कच्छवाह या कुशवाह राजपूत सूर्यवंशी क्षत्रियो की प्रमुख खाप है। परमात्मा विष्णु से यह वंश चला है, इसी वंश में महाराज वैश्वस्त मनु का जन्म हुआ था । महाराज मनु के पुत्र इक्ष्वाकु नाम के विश्वप्रसिद्ध प्रतापी राजा हुए, जिससे इस वंश का नाम इक्ष्वाकु वंश पड़ा ... इसी इक्ष्वाकुवंश में #भगवान_राम का जन्म हुआ, भगवान राम के दो पुत्र है ... ज्येष्ठ पुत्र का नाम कुश है, एवं छोटे पुत्र का नाम लव ।।  कर्नल टॉड ने कच्छवाहो के इतिहास में बहुत बड़ी भूल है ... कर्नल टॉड ने लिखा है ..  The Kacchwah or kachhwa race claims desent form kush the Second son of Rama , King Of Koshula . (  Annaals and antiques of rajsthan Vol II P.333 )  जबकि इसके उलट वाल्मीकि रामायण एवं विष्णुपुराण जैसे प्रामाणिक वैदिक पोथियों में स्पष्ठ लिख्ता है, की भगवान राम के ज्येष्ठपुत्र का नाम " कुश " था ।  भगवन् रामपत्नी सा प्रसूता दारकद्वयम् ।  ततो रक्षां महातेजः कुरु भूतविनाशिनीम् ॥ तेषां तद् वचनं श्रुत्वा महर्षिः समुपागमत् । बालचन्द्रप्रतीकाशी द...

चंद्रवंशी_क्षत्रिय_रवानी_कुल_के_राजपूतो_का_इतिहास

.     ●#चंद्रवंशी_क्षत्रिय_रवानी_कुल_के_राजपूतो_का_इतिहास● वंश - #चंद्रवंश कुल - #रवानी (पुरुवंशी,भरतवंशी,   कुरूवंशी,         #बृहद्रथवंशी) कुलदेवी - बंदी (जरा) माता कुलदेवी स्थान - #राजगीर कुल देवता- #सिद्धेश्वर महादेव गोत्र - अत्रि, #भारद्वाज प्रमुख गद्दी - राजगीर गढ़ व स्टेट - उमगा स्टेट, #रवाणगढ़, बांधवगढ़ (1 वर्ष), चुनारगढ़ (543 ई.पु), कुमाऊं वेद - यजुर्वेद उप वेद - धनुर्वेद शाखा - मध्यान्दनीय  सूत्र - कात्यायन (गृह) वर्ण - #क्षत्रिय  जाति - #राजपूत                ★#रवानी_कुल_का_इतिहास★ #रवानी_कुल_के_क्षत्रिय_राजपूतों ने 2800 वर्ष वैदक काल से लेकर कलियुग तक #मगध पर शासन किया।  रवानी कुल मगध (बिहार) को स्थापित एवं शासन करने वाला प्रथम एवं प्राचीनतम क्षत्रिय राजवंश है। रवानी (कुल) वंश #बृहद्रथ_वंश का ही परिवर्तित नाम है।  रवानी कुल की उत्पत्ति #चंद्रवंशी_क्षत्रिय_वंश से है, व इनकी वंश श्रंखला पुरुकुल की है। सबसे पहले यह कुल #पुरुवंश कहलाया, फिर #भरतवंश, फिर #कुरुवंश, फिर बृह...

भारत के प्राचीन वंश

पहला प्राचीन वंश... ब्रह्मा कुल :ब्रह्माजी की प्रमुख रूप से तीन पत्नियां थीं। सावित्री, गायत्री और सरस्वती। तिनों से उनको पुत्र और पुत्रियों की प्राप्ति हुई। इसके अलावा ब्रह्मा के मानस पुत्र भी थे जिनमें से प्रमुख के नाम इस प्रकार हैं- 1.अत्रि, 2.अंगिरस, 3.भृगु, 4.कंदर्भ, 5.वशिष्ठ, 6.दक्ष, 7.स्वायंभुव मनु, 8.कृतु, 9.पुलह, 10.पुलस्त्य, 11.नारद, 12. चित्रगुप्त, 13.मरीचि, 14.सनक, 15.सनंदन, 16.सनातन और 17.सनतकुमार आदि। स्वायंभुव मनु कुल :स्वायंभुव मनु कुल की कई शाखाएं हैं। उनमें से एक प्रमुख शाखा की बात करते हैं। स्वायंभुव मनु समस्त मानव जाति के प्रथम संदेशवाहक हैं। स्वायंभुव मनु एवं शतरूपा के कुल 5 संतानें थीं जिनमें से 2 पुत्र प्रियव्रत एवं उत्तानपाद तथा 3 कन्याएं आकूति, देवहूति और प्रसूति थे। आकूति का विवाह रुचि प्रजापति के साथ और प्रसूति का विवाह दक्ष प्रजापति के साथ हुआ। देवहूति का विवाह प्रजापति कर्दम के साथ हुआ। रुचि को आकूति से एक पुत्र उत्प‍न्न हुआ जिसका नाम यज्ञ रखा गया। इनकी पत्नी का नाम दक्षिणा था।   गौरतलब है कि देवहूति ने 9 कन्याओं को जन्म दिया जिनका विवाह प्रजापतियों से ...